Spread the love

 

मंजील चाहे कितने ही मुश्किल क्यों न हो, कोशिश करने पर ही उसपर सफलता प्राप्त होती है। जिसका एक उदाहरण बनकर सामने आई बिकलांग छात्रा सुचरिता दास।

 

हालही में शिलचर ईटखोला के वंश गोस्वामी नेशनल डिफेंस एकाडेमी के इम्तिहान में सर्वभारतीय स्तर पर ३३३ रेंक प्राप्त कर घाटी का नाम रोशन किया था।और आजतक चैनल पर प्रसारित स्वेता सिंह के बंदे मातरम शो से वह अनुप्राणित हुए थे। लेकिन शारीरिक संघर्षपूर्ण जीवन धारा से जुझ रहे सुचरिता दास अपने पिता को देख अनुप्राणित हुई और बंगला बिषय पर सर्वोच्च नम्बर हासिल कर घाटी को गर्वित किया।अव सवाल यह उठता है कि,वंश गोस्वामी नेशनल लेभल पर श्रेष्ठता हासिल किया, लेकिन सुचरिता बंगला बिषय पर सर्वोच्च नम्बर हासिल कर कैसे बराकघाटी का नाम रोशन किया है?

आईए चर्चा करते हैं,इन दोनों परीक्षाओं के अंतर पर।

 

असम राज्य के शिलचर शहर से सटें छोटा दुधपातिल गांव, जहां रहनेवाले ज्यादातर लोग रोज मररे के जीवन से जुड़े हुए हैं।उसी गांव में रहनेवाले एक छात्रा सुचरिता दास जो बचपन से ही शारीरिक संघर्षपूर्ण जीवन से लड़ाई कर रही है।पिता एक फार्मासिस्ट के रुप में लम्बे समय तक गांव रहनेवाले लोगों का सेवा किया ।और अपने दैनंदिन जीवन के कई कठिनाईओं से लड़ते हुए परिवार की गुजारा भी किया। पिता के इसी कर्म से अनुप्राणित होकर डॉक्टर बनने का सप्ना बुनना शुरू किया।सुचरिता दास ने इस साल के उच्च माध्यमिक दुसरे बर्ष के फाइनल इम्तिहान में बंगला बिषय पर सर्वोच्च नम्बर हासिल कर बराघाटी का नाम रोशन किया है। उसके इस सफलता से गर्बित है उसके अभिभावक और गर्बित है शिक्षक महल भी। अभी सुचरिता एक अच्छे डॉक्टर बनकर देश सहित अपने गांव का सेवा करने का ख्वाब लेकर आगे बढ़ना चाहती है। उसके इस सफलता पर सुचरिता दास ने अपने पिता, माता और बहन सहित शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी आभार व्यक्त किया है।

 

अव अगर सवाल उठा कि,बंगला बिषय पर सर्वोच्च नम्बर पाना, या फिर लेटर या स्टार मार्कस लाने से बराकघाटी का नाम कैसे उज्वल हो सकता है? जबकि शिलचर इटखोला के वंश गोस्वामी नेशनल डिफेंस एकाडेमी के इम्तिहान में सर्वभारतीय स्तर पर ३३३ रेंक प्राप्त कर राज्य का नाम रोशन किया है।

सुचरिता दास के बंगला बिषय पर सर्वोच्च नम्बर हासिल करना अथवा लेटर या स्टार मार्कस लाना बड़ी बात नहीं है।बड़ी बात यह है कि,सुचरिता ने बंगला बिषय पर सफलता प्राप्त किया है। क्यों कि सन १९६१ के बंगला भाषा आन्दोलन में बराकघाटी के ११ लोग शहीद होकर बंगला भाषा को बराकघाटी में सरकारी भाषा का मान्यता दिया है। जिसके चलते बंगला बिषय पर सफलता प्राप्त करना बराकघाटी में रहनेवाले सभी लोगों के लिए गर्व का बिषय बन गया है।सुचरिता दास शारीरिक संघर्षपूर्ण जीवन धारा से जुझ कर भी बंगला को एकबार फिर से उजागर करने में सफल भुमिका निभाई है।बराकघाटी में रहनेवाले हिन्दू बंगाली ही हमेशा अपने अधिकार को पाने हेतु कई चुनौती और बांधा-बिपत्ती को झेला है और आज भी झेल रहे हैं। आनेवाले १९ मई को भाषा शहीद दिवस पालन किया जाएगा,और इस दिन को स्मरणीय करने में विभिन्न निजी संगठन तैयारी भी सम्पन्न करली है। आनेवाले १६ मई को भाषा आन्दोलन में मारे गए शहीदों के स्मरण में बिभीन्न भाषा-जनगोष्ठि और जनजाति के लोग एकजुट होकर बराकघाटी में महा रैली निकालकर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेगी।और इस अवसर पर सुचरिता दास के बंगला बिषय पर सफलता प्राप्त करना पुरे बराकघाटी के लोगों के लिए एक इतिहास स्वरुप उमर आया है।सुचरिता दास के यह सफलता पर गर्वित है पुरा बराकघाटी। गर्वित है घाटी में रहनेवाले विभिन्न जाति-जनजाति के लोग भी।


Spread the love

By Admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *